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सभी आरक्षण वालों को ओपेन चैलेंज और 10 लाख का इनाम अगर आरक्षण को वो अधिकार साबित कर दे यानी संविधान में ये दिखा दे जिसमें लिखा हो कि SC ST को आरक्षण देना राज्य या केंद्र सरकार की मजबूरी है, उसे हर कीमत पर आरक्षण देना ही होगा
शिक्षा में आरक्षण यानी आज MBBS इंजीनियरिंग आदि में जो आरक्षण दिया जा रहा है वह आर्टिकल 15(4) के कारण संभव होता है परंतु आर्टिकल 15(4) संविधान संशोधन करके लाया गया है यानी मूल संविधान में तो शिक्षा में आरक्षण 15(4) दिया ही नहीं गया था आरक्षण को अधिकार कहना तो बहुत दूर की बात हैअगर आरक्षण वास्तव में अधिकार होता तो संविधान बनाते समय ही 15(4) रखा जाता यह इकलौता प्रमाण ही काफी है कि आरक्षण कोई अधिकार नहीं है नौकरी में आरक्षण की बात आर्टिकल 16 में की गई हैइस आर्टिकल का शीर्षक ही हैEquality of opportunity in matter of public employment यानी इसका शीर्षक ही बताता है कि गवर्नमेंट की नौकरियों में सबको समान हक दिया जाएगा इसका para 1 पढ़िएThere shall be equality of opportunity in matter relating to employment under the state यानी बहुत साफ है संविधान सबसे पहले यह लिख रहा है कि भारत का कोई भी नागरिक चाहे वह क्षत्रिय हो चाहे कायस्थ हो चाहे अहीर हो चाहे महार हो उसको रोजगार में समान अवसर दिया जाएगा यानी अगर किसी अहीर जाटव लिए 100 सीट उपलब्ध है तो 100 सीट ही कायस्थ के लिए उपलब्ध होगीअब इसका पैरा २ देखिए No citizen shall on ground only of religion race, caste sex be enegible for or discriminated in respect of public employment यानी पैरा दो भी साफ-साफ बोलता है कि किसी को भी जाति के कारण अपॉइंटमेंट में भेदभाव नहीं कर सकते यानी अगर कोई अहीर या जाटव को ५० नंबर पर नौकरी मिलती है तो कायस्थ को इससे ज्यादा नंबर पाने पर नौकरी से रोक नहीं सकते यानी आर्टिकल 16 में शीर्षक सहित पहला दूसरा दोनों पैरा साफ-साफ बताते हैं कि अवसर में समानता मूल अधिकार है ना कीआरक्षण अब para ४ देखिए जिसमें आरक्षण की चर्चा है Nothing in this article shal prevent the state from making any provision for the reservation of appointment or post in favour of any backward class of citizen who is in the opinion of state is not adequately represented इस आर्टिकल में लिखा गया है कि अगर सरकार चाहे तो जो लोग भी बैकवर्ड हैं और नौकरी में कम है उनके लिए प्रावधान कर सकती है इसमें भी यह कहीं नहीं लिखा है कि सरकार को प्रावधान करना जरूरी है ना कही लिखा है कि ये हक हैआर्टिकल 330 जिसमें लोकसभा विधान सभा में आरक्षण 10 साल के लिए अधिकार बनाया गया था देखिए उसमें साफ साफ अधिकार की भाषा यूज की गई है 1) Seats shall be reserved in the House of the People for —(a) the Scheduled Castes;(b) the Scheduled Tribes (2) The number of seats reserved in any State or Union territory will be as the population of the Scheduled Castes यहां 10 साल के लिए आरक्षण अधिकार बनाया गया था तो साफ-साफ लिखा है seat shall be reserved and according to population लेकिन जो नौकरियों में आरक्षण की बात है 16 (4)उसकी भाषा एकदम अलग है जैसा कि ऊपर लिखा है कि nothing will prevent state to provide reservation अगर नौकरियों में भी आरक्षण को अधिकार बनाना होता तो अंबेडकर उसकी भाषा 330 जैसे ही ऐसे ही लिखतेState shall provide reservation to socially and economicaly backward or sc st equal to their populationयानी इन दोनो की भाषा को भी पढ़ने से साफ है की अधिकार सिर्फ लोकसभा विधानसभा का आरक्षण था वह भी सिर्फ 10 साल, नौकरी में आरक्षण सिर्फ सरकार की मर्जी पर था ये सभी आर्टिकल एक साथ पढ़ने से साफ है कि सबको अवसर की समानता देना मूल अधिकार है और आरक्षण सिर्फ एक प्रोविजन है जो स्टेट की मर्जी पर छोड़ा गया है अगर वह चाहे तो दे और ना चाहे तो नहीं दे इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने अमित यादव वर्सेस स्टेट ऑफ झारखंड के पैरा 16 से 20 में साफ-साफ कहा कि आरक्षण कोई अधिकार नहीं है यह एक इनेबलिंग प्रोविजन है जो की स्टेट की मर्जी पर है मुकेश कुमार वर्सेस स्टेट आफ उत्तराखंड के पारा 12 में भी यही बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है इसके अलावा कई अन्य फैसले द्वारा आरक्षण के अधिकार बताने को रिजेक्ट किया है और बोला है कि स्टेट चाहे तो आरक्षण दे चाहे तो ना दे और ये सब फैसले बिल्कुल संविधान के अनुसार है सभी आरक्षण समर्थकों को अब जवाब दो कि वास्तव में अवसर की समानता मूल अधिकार है और आरक्षण एक अपवाद इसीलिए आर्टिकल 16 में इसे चौथे नंबर पर रखा गया है और पहले नंबर पर अवसर की समानता रखी गई है
29 अगस्त 1947 को अंबेडकर ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए और उसके पहले ही लगभग पूरा संविधान का मसौदा BN RAW ने तैयार किया कर दिया था आरक्षण सहित बहुत सारे मसलों पर तो संविधान सभा में बहस भी हो गई थी 27 अगस्त 1947 कोयहां तक की अंबेडकर ने जो प्रस्ताव रखा था कि अनुसूचित जातियों के सीट पर जीतने को 35% अनुसूचित जाति का वोट पाना अनिवार्य हो उस पर भी मतदान हुआ था और अंबेडकर जिन्होंने यह अमेंडमेंट लाया था वह उस दिन संविधान सभा में आए ही नहीं DAKSHAYNI और खांडेकर जैसे सदस्यों ने अंबेडकर की गहरी आलोचना की दोनों दलित थे दोनों ने कहा कि यह संविधान सभा अंबेडकर को स्पष्ट संदेश दे रही है कि उनका बैक डोर से एक तरह से फिर से अलग निर्वाचन लाने का विभाजनकारी एजेंडा नहीं चलेगा और तुम संविधान का श्रेय अंबेडकर को दे रहे होगजबे आरक्षण पर ही अंबेडकर के कई प्रस्ताव संविधान सभा में गिर चुके हैं जैसे अंबेडकर कैबिनेट में आरक्षण मांग रहे थे नौकरी में आबादी के बराबर आरक्षण मांग रहे थे उनके सभी प्रस्ताव संविधान सभा में रिजेक्ट हो गए पूरा संविधान निर्माता होना तो अलग बात है आरक्षण पर ही उनकी नहीं चलीसंविधान पूरी संविधान सभा ने मिलकर ही बनाया है अगर किसी एक व्यक्ति को श्री देना है तो वह सदैव संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद को दिया जाएगा ना कि एक कमेटी के अध्यक्ष को संविधान सभा में ऐसी कई कमेटी थी और जो सबसे महत्वपूर्ण कमेटी थी उन सबके अध्यक्ष तो खुद सरदार पटेल थे जैसे मूल अधिकार कमेटी इत्यादि तो अगर किसी कमेटी के अध्यक्ष को संविधान निर्माता बनाना हो तब पटेल को कर सकते हो अंबेडकर का बनाया ड्राफ्ट बाद में एडवाइजरी कमेटी में जाता था जिसके अध्यक्ष खुद सरदार पटेल थे माइनॉरिटी राइट पर एडवाइजरी कमेटी जिसने आरक्षण डिसाइड किया उसके अध्यक्ष खुद सरदार पटेल थेतो एक व्यक्ति को संविधान निर्माता बनाना है तो सरदार पटेल को भी कह सकते होध्यान से देखा कि कैसे एक दलित महिला ने अंबेडकर के आरक्षण के प्रस्ताव का विरोध किया और अंबेडकर और नागप्पा का प्रस्ताव ही संविधान में गिर गया
हमें यह पाठ पढ़ाया जा रहा है कि अंबेडकर संविधान निर्माता है जबकि वास्तविकता यह है कि अंबेडकर ने आरक्षण के लिए गठित कांस्टीट्यूशनल कमेटी में यह प्रस्ताव रखा था कि SC ST को आबादी के बराबर नौकरी दी जाए (proportion to population word ) ये शब्द स्पष्ट रूप से लिखा जाएलेकिन संविधान कमेटी ने उनका प्रस्ताव भारी बहुमत से रिजेक्ट कर दिया और संविधान के आर्टिकल 16(4) में यह शब्द लिखा गयाadequate representation without afecting efficiency of administration)जब अंबेडकर आरक्षण पर ही अपनी मांग लागू नहीं कर पाए और हमें पढ़ाया जा रहा है कि पूरा संविधान उन्होंने ही बना दियाइसीलिए मेरे द्वारा बार-बार कहा जा रहा है कि एससी एसटी को जो नौकरी में आबादी के बराबर जो आरक्षण दिया जा रहा है वह संविधान विरोधी और दलित तुष्टिकरण हैref फ्रेमिंग ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन वॉल्यूम 2 पेज
मध्य प्रदेश में ओबीसी का 27% आरक्षण न होने का कारण SC ST का अत्यधिक लालच और स्वार्थ और OBC के नेताओं का इनके आगे डरकर पूछ हिलाना हैसंविधान के अनुसार एससी एसटी ओबीसी का आरक्षण16(4) 50% से ज्यादा नहीं हो सकता केंद्र में एससी एसटी आरक्षण 23 परसेंट है लेकिन एससी एसटी ने यहां अत्यधिक लालच करके अपना आरक्षण 37% कर लिया है इसलिए ओबीसी का आरक्षण 27 परसेंट हो नहीं पा रहा एमपी में भी एससी एसटी आरक्षण घटकर तुरंत केंद्र जैसे 23 परसेंट किया जाए जिससे यहां भी ओबीसी का आरक्षण 50% हो जाएगाएससी एसटीobc आरक्षण संविधान के अनुसार 50% से ज्यादा इसलिए नही हो सकता क्योंकिजब संविधान सभा में जातिगत आरक्षण पर चर्चा हो रही थी तो बहुत सारे सदस्यों ने इसका भारी विरोध किया कि यह इक्वलिटी के अगेंस्ट है अंबेडकर को 30 नवम्बर 1948 को यह कहना पड़ा कि यह आरक्षण मैं सदैव माइनॉरिटी ऑफ सीट पर ही दूंगा तब संविधान सभा ने इसको पास किया था लेकिन उस समय संविधान सभा में तुम्हारे जैसे बहुत से सदस्य थे जो तुम्हारे जैसे ही अपने को सामाजिक निचला दलित पिछड़ा इत्यादि घोषित किए हुए थेउन्होंने संविधान सभा में अमेंडमेंट लाया था कि हमे आबादी के बराबर आरक्षण दिया जाए, एसपी देशमुख, चंद्रिका राम ,रणवीर सिंह, पिल्लाई , नागप्पा इत्यादि सदस्यों ने आबादी के बराबर आरक्षण का अमेंडमेंट लाया था सब गिर गया इसके अलावा आरक्षण पर बनी माइनॉरिटी कमेटी एडवाइजरी कमेटी दोनों जगह तुम्हारे दलित लीडरों ने नौकरी में आबादी के बराबर आरक्षण मांग की थी दोनों बार संविधान में वहां भी रिजेक्ट हुआ है 30 नवंबर 1948 को अगर अंबेडकर संविधान सभा को यह आश्वासन नहीं देते कि यह आरक्षण बहुत थोड़ा सा रहेगा माइनॉरिटी ऑफ सीट पर ही रहेगा तो देश में जातिगत आरक्षण नामक कोई चिड़िया पास ही नहीं होती क्योंकि संविधान सभा।में खुद सरदार पटेल बहुत स्ट्रांग्ली इक्वलिटी के पक्ष में थे उन्होंने तो नौकरियों में आरक्षण की मांग को जहर तक बता दिया थातो कोर्ट ने संविधान के अनुसार ही जातिगत आरक्षण पर रोक लगाई है और आगे भी लगाएगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ही संविधान का रक्षक हैइसलिए कहते हैं पढ़ाई करो नहीं तो हमारे जैसे तुम्हारे पास भी दो हाथ पैर होने के बाद भी अपने को जन्मजात पिछड़े निचला सामाजिक नीच आदि घोषित करके कम पढ़ाई की भीख मांगनी पड़ेगी अपने पूर्वजो को पगलेट और जन्मजात पिछड़ा कहना पड़ेगा सिर्फ पढ़ाई चोरी के लिए